रात को जब तुम्हारी याद आई
न जाने क्यों आंख भर आई
मेरे पास तो यादों के सिवा कुछ न था
चाँद में मुझे तुम्हारी शकल नज़र आई
मुझे मरने का तो डर न था
पर मौत तो तब हसीं होगी
जब तेरी बाहों में मरु और दिल रुक जाये
जब तेरी आँखों से एक आसूं मेरी रुके दिल को वापस धडकाऐ
मुझे अपनी जिंदगी में जो गम मिले
वो तेरे एक अहसास से धुल जाये
अब और कुछ नहीं मांगती में उस रब से
मेरे दिल को तू ही अब समझाए